40 साल की तीन बच्चो की औरत 18 साल

चूत चोदन को सब गये, चोद पाए ना कोई, Antarvasna जब चोदन की बारी आये लण्ड खड़ा ना होए।
हेलो दोंस्तों, मैं अन्नू इसी जुमले का साथ आप सभी का स्वागत करता हूँ। मै आजमगढ़ का रहने वाला हूँ। आपको अपनी लाइफ की स्टोरी सुना रहा हूँ। मैं अभी केवल 18 साल का हूँ। पर मैं कई लड़कियों को चोद चूका हूँ। कई दिन बीत चुके थे, मुझे बड़े दिन से कोई चूत चोदने को नही मिली थी। की इतने में मेरे घर के सामने के मकान में एक नया माल रहने आ गया। असल में मेरे के सामने एक मुस्लिम परिवार रहता था। मैं हिन्दू था, पर फिर भी हम दोनों एक दूसरे के घर जाते थे।

सामने वाले परिवार के मुखिया सद्दीक थे। उनकी 6 लड़कियाँ थी। मैं जाकर सद्दीक चाचा से।दुआ सलाम करता था। उनकी 1 लड़की सादी के लिए बची थी जबकि सारी लड़कियां अपनी अपनी ससुराल रहती थी। मैं सद्दीक।चाचा को होली पर आने घर बुलाता था, वहीँ ईद में उसके घर जाता था। मैं कई दिन से सोच रहा था की कास कहीं कोई चूत मिल जाती इतने में सद्दीक चाचा की दूसरे नंबर की लड़की सलमा बानो अपने तीन बच्चो को लेकर वहां आ गयी। बड़ा कटीला माल था दोंस्तों। मेरा कमरा भी पहली मंजिल पर था और सलमा बानो भी सद्दीक चाचा के पहली मंजिल पर आकर रहने लगी। उसका उसके मर्द शकील से कुछ झगड़ा हो गया था। इसीलिए कुछ दिनों के लिए सलमा अपने अब्बू के घर आ गयी थी।

वो देखने में अच्छा खासा मॉल थी। सुबह 8 बजे ही नहाती थी और छत पर आकर धुप सुखाती थी। मैं उसको अब हर दिन ताड़ने लगा। एक दिन वो बाथरूम में नँगी नहा रही थी, मैं अपनी पहली मंजिल की बालकनी में आ गया और घूर घूरकर उसे देखने लगा। उसने मुझे देख दिया तो सारी खिड़किया बन्द कर ली। 40 साल की सलमा जान गई की मैं उसे बुरी नियत से देखता हूँ। हालाँकि उसने सद्दीक चचा से मेरी कोई सिखायत नही की।

एक दिन वो ना जाने किस मूड में थी। अपनी बालकनी में खड़ी हो गयी। और मेरी बालकनी की ओर घूरने लगी। मैं भी बालकनी में आ गया। मैं भी सलमा को घूरने लगा और आँखों ही आँखों में पूछने लगा की बोल देगी। सलमा भले ही 40 साल की थी, पर देखते में 30 की थी लगती थी। आज भी चोदने लायक मॉल थी। उसका अक्सर अपने आदमी शकील से झगड़ा हो जाता था। मियां बीबी में कम पटती थी। इसीलिए वो कुछ दिन अपने अब्बू के घर रहने आयी थी। उस दिन दोंस्तों, ना वो भागी और ना मैं भागा। बस इसी तरह दोंस्तों, मेरा सलमा बनो से टांका भीड़ गया। अब हम एक दूसरे को खूब आँखों ही आँखों में देखने लगे और खूब नजरों ही नजरों में चोदने लगे। हमारी शरारते धीरे धीरे बढ़ गयी।

हम दोनों एक दूसरे।को लव लेटर देने लगे। मैं कागज पर लेटर लिखता, उसे ईंट में गोल गोल मोड़ देता और सलमा बानो के पास भेज देता। सलमा भी ऐसा ही करती। पहले तो प्यार मुहब्बत की बाते हुई फिर जैसा होता है वही हुआ। अब चूत चुदाई की बाते होने लगी। हम दोनों अब साफ साफ गन्दी गन्दी बाते करने लगी। मुझे अपनी चूत दोगी, चोद चोदके फाड़ डालूंगा मैंने लेटर से पूछा। तुम क्या फाड़ोगे, मेरी तो पहले से फटी है, 3 बच्चे क्या बिना चुदवाये हो गये, उधर से जवाब आया।

अरे भोसड़ी के !! लौण्डिया तो बड़ी तेज है!! अब तो इसकी चूत ले ही लो मैंने सोचा। हम दोनों ने अब एक दूसरे के मोबाइल नॉ ले लिए। मैंने उससे कहा कि कल 12 बजे किसी बहाने से मार्किट जाए , तब मैं उसे चोदूंगा। जुगाड़ फिट हो गया दोंस्तों, सलमा बनो बुरका पहनकर 12 बजे अगले दिन बजार गयी। मैं पीछे बाइक पर निकला। कुछ देर बाद गीता रोड पर सलमा उतर गई। मैंने उसे बैठा लिया। मैं उसे लेकर एक दोस्त के कमरे पर आया। यहाँ एक कमरा हमेशा खाली रहता है।

हम दोनों अंदर गये और एक दूसरे पर कूद पड़े। मैं भी जितना बेक़रार था, सलमा भी उतना।ही बेक़रार थी। उसने बुरका उठा दिया। मैंने उसके लबो पर चुम्बनों की बरसात कर थी। आज तो मैं इसको इतना चोदूंगा की अपने मर्द को चोदकर सिर्फ मुझसे ही चुदवाएगी। मैंने सोचा। सलमा और मैं एक दूसरे को पागलों की तरह चूमने चाटने लगे। मेरे हाथ उसके बड़े बड़े मम्मो पर चले गए। मैं उनको दबाने लगा। उसने बुरका निकाल दिया। सायद सलमा के पास बुर थी तभी उसने बुर्क़ा पहन रखा था।

सलमा अब नारंगी रंग के चमकदार सलवार सूट में थी। मैंने उसको एक तख्ती पर खींच लिया। हम दोनों ने एक दूसरे को गले घर लिया। वो मुझको अपना शौहर समझके चूमने चाटने लगी। मैंने जल्दी से उसके हाथ ऊपर किये, उसका सूट निकाल दिया, फिर ब्रा भी निकाल दी। बॉप रे!! 3 बच्चे पैदा होने से बाद बनी सलमा की छातियां कसी थी। मेरी तो आँखें खुल गयी उसकी मस्त गोल छातियां देखकर।
सलमा! मैं आज तुझे खूब चोदूंगा! मैंने जोश में कहा
अन्नू!! तू जितना मन करे चोद ले मुझे!! सलमा बनो बोली।

हालाँकि दोंस्तों कहाँ मैं 16 साल का नया लड़का था और कहाँ वो 40 साल की औरत थी। पर दोंस्तों अय्यासी तो अय्यासी ही होती है। चुदाई तो बस चुदाई ही होती है, जिसके लिए बस एक बुर चाहिए होती है और बस एक लण्ड। और दोंस्तों जब मेरे पास था लण्ड तो मैं क्यों नही करता घमंड। बस यही सब सोचकर मैं सलमा बनो के मस्त मम्मो पर टूट पड़ा। मुँह में भरके उसकी मस्त गोल छातियां पीने लगा। उफ़्फ़ क्या काले काले घेरे थे। मैं खूब मस्ती से उसकी दोनों छातियाँ लेकर पीने लगा। आप ये कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे पढ़ रहे है.

मुझे लग रहा है कि सलमा बानो कई दिन ने नही चुदी थी, कई दिनों से उसने लण्ड नही खाया था। सलमा ने खुद अपनी सलवार का नारा खोल दिया। सलवार उतार दी, अपनी चड्डी भी उसने उतार दी। मैंने सलमा बानो की चड्डी ले ली और बुर की जनाना खुश्बू को सूंघने लगा। उफ्फ्फ्फ़! क्या मदमस्त महक थी दोंस्तों। मैंने चड्डी सूंघ कर एक ओर रख दी। मैं फिर से उसकी छातियाँ पीने लगा। मैंने देखा सलमा जल्दी जल्दी अपनी चूत के छेद में अपनी दो उँगलियाँ डालने लगी और जोर जोर से अपनी बड़ी सी बुर फेटने लगी।

ये मादक काम देखकर मैंने उनकी छातियां छोड़ दी। मैंने उसके भोंसड़े पर आ गया। सलमा बानो बड़ी चुदासी हो गयी थी। वो जल्दी जल्दी अपनी बुर फेटने लगी।
अन्नू!! मुझे जल्दी चोदो!! अन्नू!! अब मुझे अपना लण्ड खिलादो!! सलमा बानो एकाएक कहने लगी। मैंने उसका हाथ बुर पर से हटाया। अपने कपड़े निकाले। लण्ड बुर पर लगाया और सलमा बानो की चूत की आग शांत करने लगा। मैं धकाधक उसे लेने लगा। सलमा मस्त हो गयी।

ले साली! कितना लण्ड खाएगी!! ले आज जी भरके लण्ड ले ले! मैं सलमा को धकाधक चोदने लगा। 3 बच्चे उसके हो चुके थे, पर सलमा का फिगर आज भी मेन्टेन था। मैं उसे जोर जोर से हौकने लगा। खूब चोदा साली को। एक मुस्लमान होकर एक हिन्दू का लण्ड मजे से ले रही थी। उसे मैंने कोई 25 मिनट चोदा होगा, तभी मेरा बदन अकड़ने लगा। सलमा ने अपने नाख़ून मेरी नँगी पीठ पर गड़ा दिए। और अब तो और जोश में आ गया। पकापक पकापक चोद चोद के मैंने उसकी बुर में बुरादा भर दिया।

मैंने अपना माल उसकी चूत में ही छोड़ दिया। मैंने लण्ड निकाला। सलमा की चूत से कुछ देर बाद मेरा माल बाहर आ गया। उसने अपनी उँगलियों से मेरा माल उठा लिया और पूरा पी गयी। दोंस्तों, ऐसी भयंकर रंडी जैसी चुदक्कड़ औरत मैंने बड़ी दिनों बाद देखि थी। मन हुआ की दोनों टांगे उसकी चीर दूँ और अपने सामने उसके भोंसड़े को फटते हुए देखो। ऐसी रंडी जैसी चुदक्कड़ औरत को पाकर मैं बहुत खुश था। मैंने फैसला किया कि इसकी बुर को खूब ऊँगली करूँगा।

पैर खोल रंडी!! मैने जोश में कहा और सलमा के दोनों पैर खूब खोल दिए। मैंने अपनी बीच वाली दो उँगलियाँ ली और उसके भोंसड़े में डाल दी और मथने लगा। पहले तो छिनाल को कुछ महसूस नही हुआ, फिर जब 20 मिनट हो गए उसकी बुर मथते मथते तो रंडी काँपने लगी। मैंने साफ साफ देखा की राण्ड का पेट मचलने लगा। उसका पेड़ू भी हिलने लगा, जैसे भूकंप आने वाला हो। सलमा के दोनों पैर ऑटोमैटिक किसी मशीन की तरह अपने आप खुलने और बंद होने लगे। मुझे ये देखकर बड़ा मजा आया। मैं और भी जोश से खूब गहराई तक सलमा की बुर मथने लगा। सायद उसका जी पॉइंट एक्टिव हो गया।

जब 30 मिनट हो गए तो सलमा कापने कराहने लगी। मैंने अपनी लम्बी लम्बी उंगलियों से उसकी बुर चोदना को चोदना जारी रखा। अचानक से उसकी बुर फैलने और सिकुड़ने लगी। मैं जान गया कि मैं सफलता के बेहद करीब हूँ। मैं और जोश से भड़कर सलमा की बुर में जल्दी जल्दी ऊँगली करने लगा। फिर कुछ देर बाद उसकी बुर से दूध भरी गाढ़ी मलाई दोंस्तों खूब सारी निकल आयी और नीचे उसकी गाण्ड से होके नीचे की ओर बहने लगी। मैं अपना मुँह लगा दिया और सलमा छिनार की पूरी मलाई चाट गया।

बड़ा मस्त अनुभव था, दोंस्तों। मीठा स्वाद था। मैंने आधे घण्टे तक उसकी चूत अपने हाथों से मथी थी, मुझे उसका फायदा मिला। मैंने सलमा राण्ड की सारी दुधिया मलाई पी ली दोंस्तों। बिलकुल फेविकोल जैसी सफ़ेद मलाई थी दोंस्तों। अब तो मेरा उत्साह आसमान छूने लगा, मैं अब उसकी रंडी की जो 3 बच्चो की माँ थी, उसकी मलाई से भीगी बुर पिने लगा। मेरे मुँह में उसकी क्रीम लग गयी। मैंने आज तक दोंस्तों कई लड़कियां चोदी थी, पर ये पहली बार था मैंने किसी छिनार की क्रीम देखि थी।

मै हैैरान था और यही सोच रहा था कि साली ये क्रीम आखिर बनती कहाँ है। मैंने फिर से सलमा की बुर पीने लगा। खूब जीब से चाट चाटकर मैं उसकी बुर पीता रहा। फिर उसकी चूत जल्दी जल्दी फैलने सिकुड़ने लगी। मैं जान गया कि लगता है फिर से कोई चमत्कार होगा। मैंने पानी चारों उँगलियाँ सलमा बानो के भोंसड़े में पेल दी। और जोर जोर से उसकी बुर अपनी चारो उंगलियों से मथने लगा। लग रहा था कहीं मैं उसका भोसड़ा ही ना फाड़ दू। मैं और और जल्दी जल्दी सलमा की बुर अपनी उँगलियों से चोदने लगा।

फिर अचानक से एक नया चमत्कार फिर हुआ। सलमा के भोंसड़े से पिच्च पिच्च करके लम्बी लम्बी पिचकारियाँ छूट गयी। मैंने अपना मुँह सामने लगा दिया और उसके बुर के मधुर रस को मैंने पी लिया। दोंस्तों, ये उसका मूत नही था। बल्कि उसकी चूत का पानी था, जो बड़ी देर तक ऊँगली करने से चूत की ग्रन्थि से निकलता है। मैं किस्मतवाला था कि मैंने सलमा बानो के 2 2 चमत्कार देखे।
मैंने इतनी मेहनत की है!! चल मेरा लौड़ा चुस रंडी!! मैंने सलमा से कहा

अब तक दोंस्तों, सलमा मेरे अंडर में आ चुकी थी। मेरी चुदासी रखेल बन चुकी थी। मेरी सेक्स गुलाम बन चुकी थी। मेरे बदन में आग सी जलने लगी। साली इस 3 बच्चों की माँ को तो मैं इतना चोदूंगा, की इसकी माँ चुद जाएगी। मैंने सलमा रानी के सारे बाले खोल दिए। उसे अपनी औरत मैं समझने लगा। सलमा पर भी चुदाई का जो जूनून चढ़ा दोंस्तों, की वो भी मेरी गुलाम हो गयी। मैंने तखत पर लेट गया। नँगी सलमा मेरे लौड़े को चूसने लगी। वो जल्दी जल्दी अपने हाथों से मेरे लण्ड को मलने लगी।

मेरे लण्ड को चूसने लगी। मैंने उसका सिर पकड़ लिया और उसके मुंह को चोदने लगा। फिर मैंने दोंस्तों, सलमा बानो को अपने लण्ड पर बैठा लिया और चोदने लगा। मेरे जोरदार धक्कों से उसके चूतड़ मस्त मस्त मटकने लगे, उनकी दोनों छातियां खट खट उछलने लगी। एक शादी शुदा मुस्लिम औरत को मैं हिंदू होकर बजा रहा था। उसका धर्म बिगाड़ रहा था। उसको कसके चोद रहा था। मैं उसे लण्ड पर बैठाके चोद चोद कर जब थक गया तो अब सलमा उचक उचककर खुद चुदवाने लगी।

मैंने अपने दिल के सारे अरमान उस दिन पूरे कर लिए दोस्तों। खूब चोदा उस छिनार को।
चल रंडी!! अब कुतिया बन!! मैंने जोश में उसे गाल पर एक चांटा मार कर कहा। सलमा बनो कुतिया बन गयी दोंस्तों। फिर क्या ये ले!! ये ले छिनार!! कह कह के मैंने चूत से धुआं निकाल दिया। गप्प गप्प पक्क पक्क चोद चोदकर मैंने उसकी चूत पाव की तरह सुजा दी दोंस्तों। मैं उस दिन सलमा बानो की चुदाई को कभी नही भूल सकता।

उसके बाद मैंने उनको 6 महीनो तक चोदा दोंस्तों। फिर उसका उसके मर्द से समझौता हो गया दोंस्तों। और मेरी राण्ड अपने मर्द के घर चली गयी।